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"मेरी कहानी "

Updated: Sep 23, 2021



मेरा नाम मृणालिनी गुप्ता है, मेरी उम्र 59 साल ।मेरे दो बच्चे हैं मेरे पति एक आईसर्जन है। मुझे बागवानी का शौक बचपन से ही था, जो अब मेरी जिन्दगी का एक अहम हिस्सा बन चुका है। मुझे आज भी याद है, स्कूल या कहीं पर चुपके से फूल तोड़ लेना, कच्चे अमरूद तोड़ लेना जैसा कि बचपन में सभी बच्चे करते हैं मैं भी करती थी।

शादी के 7 साल बाद 1990 में मैं नये घर में शिफ्ट हो गयी। 2700 स्क्वायर फिट का घर हमारा, बस यही से शुरू हुआ हमारे पौधे खरीदने का सिलसिला गमले खाद वह सब कुछ जिसकी बागवानी में जरूरत होती है। माली भी था, फिर भी मैं 3 से 4 घंटे बगिया में काम करती, कभी थकान भी महसूस नही होती, बहुत अच्छा लगता।

अपने छोटे से बगीचे को मैं घंटो बैठकर निहारती, पेड़-पौधो को दुलारती और खुश होती। धीरे-धीरे एक सुन्दर से बगीचे का निर्माण हो गया। खुद से बागवानी करते-करते मुझे इतना अनुभव हो गया कि नये पौधे कैसे तैयार हो जाते है, उनका जीवन कैसे बचाना है, कैसे देखभलकरनी है आदि।


फिर सर्दी हो या गर्मी, तेज धुप हो या बारिश मैं बगिया मे काम करती रहती ,मुझे बहुत अच्छा लगता पता ही नही लगता कि कितना वक्त बीत गया।

निरंतर पौधे खरीदती रहती शुरू से ही सब तरह के पौधें खरीदती रहती थी। House plants ,seasnal, perinial औऱ भी बहुत।2012 मे छोटी बेटी की शादी के बाद बहुत अकेलापन महसूस कर रही थी ।मन मे एक द्धन्द था। किसी काम मे मन नही लगता था।


आखिरकार मेरी बागवानी ने मेरा साथ दिया।इन्टरनेट से पेड़-पौधों के बारे मे तीन से चार घंटे study करने लगी, notes बनाने लगी,एक जुनून सा था।पौधो ने सीढ़ियों, बालकनी टेरेस मे भी अपनी जगह बना ली। और 2015 मे मैंने घर मे ही BLOSSOM NURSERY के नाम से नरसरी खोल दी,मैं busy हो गई।पौधे बढ़ते गए, लेकिन बिक कम रहे थे।2017 मेनिराशा मिली,पर बागवानी के शौक को कम नही किया।Feb 2018 मे मेरा वो सपना पूराहुआ, जिसके लिए खुली आखों से देखती थी। NBRI,RAJBHAWAN DAINIK JAGRAN से बागवानी मे पुरस्कार मिला।



अप्रैल, 2018 ने तो मेरी जिन्दगी ही बदल दी। मेरी निराशा आशा में बदल गयी।

मेरा passion proffesion में बदल गया किसी ने मुझे Lucknow farmers Market के बारे में बताया। मैंने वहाँ अपने plants का Stall लगाया, जिसमें Terrarium,Miniature garden, exotic और decorative plants थे। सब ने बहुत पसन्द किया। मैं पौधे खुद तैयार करती थी,उन्हे सजाती, संवारती, सुन्दरता बढ़ जाती थी। LFM मे मैं बराबर अपना stall लगा रही थी, धीरे-धीरे मुझे Clients मिलने लगे। मुझसे कोई पौधे में पानी डालने के बारे में पूंछता, तो मैं उसे उस पौधे का पूरा जीवन बता देती जिससे लोग संतुष्ट होते, और पौधे खरीद लेते जिससे मुझे बहुत खुशी और ताकत मिल ती। एक दिन Cherry tree caffe की Owner ने मुझे contact किया, और कहा कि मेरे कैफे में Landscaping करेगी ,यह सुनकर कानों पर विश्वास नही हुआ।वो मेरा पहला project था और LFM ने मुझे बना दिया Landscaper. मुझे clients मिलनें लगे। Cherry tree caffe, Habibullah estate's garden ,Vandana Sehgal's garden में visit का काम मिल गया। कुछ लोग gardening consultation लेने लगे इस तरह मैं Busy हो गई और पौधे भी बिकने लगे। Lucknow farmer market ने मुझे Home Gardning consultant and Landscaper से मेरी खुद की पहचान दी। अंत मे एक बात बताना चाहुंगी,लोग मुझसे पूंछते ,कया आप BOTANY से हैं,मुसकरा कर कहती , नहीं भाई मैं तो ART STREAM से हूँ।अनुभव व मेहनत हमे सफलता की राह दिखाती है,जो हमे LUCKNOW FARMERS MARKET जैसे मंच से मिली। आगे मेरा सपना है कि मैं बागवानी, और बोनसाई में लोगो को शिक्षित करूं जिससे लोग अपने घर को हरा-भरा व पेड़ पौधों से सजा सके एवं शुद्ध हवा प्राप्त करे तथा अपने घरों में शुद्ध वातावरण बना सकें, जिसकी आज कोविड- 19 के दौर में सबको बहुत जरूरत है जो हमें अधिक से अधिक पेड़ - पौधे लगाने से ही प्राप्त हो सकती है।



 
 
 

1 Comment


Lorenzo
Lorenzo
Mar 26

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